ट्रांसफॉर्मेशन...! लेखनी प्रतियोगिता -23-Nov-2021
ट्रांसफॉर्मेशन
अलमारी में रखे काँच के बर्तन पर छत पर फैले इलेक्ट्रिक तारों की छाया दिखाई दे रही थी। हालाँकि, एक काँच की ट्यूब सीधी खड़ी रखी हुयी थी। उस ट्यूब के काले द्रव में अलग-अलग अंग तैर रहे थे, बिना आंखों वाला चेहरा उस ट्यूब को अंदर से धकेल रहा था। अलमारी से कुछ ही दूरी पर एक रोबॉट खड़ा था। उसके विशाल लोहे के अंग जमीन के चमकदार फर्श पर साफ दिखाई दे रहे थे।
अपना संतुलन बनाए रखते हुए, रोबॉट हॉल के बीच में रखे हुये काँच के बॉक्स की ओर चला गया। उसने कुछ कोड डालकर वह काँच का बॉक्स खोल दिया। उसके अंदर एक अचेत मानव शरीर तैर रहा था। रोबॉट ने उसके हाथ में पकड़ी एक पारदर्शी ट्यूब उसकी गर्दन के पीछे वाले सॉकेट में ड़ाल दी। ट्यूब का दूसरा सिरा कंप्यूटर से जुड़ा था। बॉक्स में रखे आदमी की यादें कंप्यूटर पर आने लगीं।
दृश्य १
रेशमी बिस्तर पर बैठा एक बच्चा। एक गेंद उसकी ओर लुढ़क कर आ रही है। बच्चा खुशी से ताली बजा रहा है।
दृश्य २
एक छोटा लड़का अपने दोस्तों के साथ टेबल पर बैठा है। सामने केक, उस पर जलती मोमबत्ती। लड़का अपने सीने में हवा भरता है और जोर से फूंकता है।
दृश्य ३
अब लड़का थोड़ा बड़ा हो गया है। वह एक पेड़ के नीचे बैठकर किताब पढ़ रहा है।
कॉलेज के कार्यक्रम का एक गाना।
पहला प्रेम प्रसंग।
अनुसंधान।
फिर शादी।
और फिर कंप्यूटर सुरक्षा बल में वैज्ञानिक के रूप में चयन।
अगला दृश्य
काले कोट पहने लोगों से घिरी एक चमकदार बहुमंजिला इमारत। हाथों में ऑटोमेटिक बंदूकें, कानों में ईयरफोन, सबके कॉलर पर कंप्यूटर सुरक्षा बल के निशान। सफेद कोट पहने वह एक लग्जरी कार से बाहर निकलता है। उसको देखकर एक के बाद एक सल्यूट। वह बिना देखे ही इमारत में घुस जाता है।
अगला दृश्य
कुछ रोबॉट्स टेबल पर पड़े हुये थे। कुछ सोचकर उसकी उंगलियां लैपटॉप के कीबोर्ड पर चल रही हैं। सामने वाले रोबॉट को ढेर सारे निर्देश मिल रहे हैं। बीप बीप... खतरे की सूचना। रोबॉट ने आदेश स्वीकार करना बंद कर दिया है।
बीप बीप... एक रोबॉट के हाथ में धारदार चाकू था। गुस्से में आकर वह कीबोर्ड पर अपनी उँगलियाँ पीटने लगता है। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। रोबॉट के हाथों के चाक़ू ने अपना काम कर दिया था। रवि का मृत शरीर उसके प्रयोगशाला में पड़ा था।
बीप बीप... कुछ काउंटडाउन लगा कर रोबोट ने उस मानव के गर्दन का प्लग निकाल दिया और दरवाजे से बाहर निकल गया।
०:१०
०:०५
०:००
रवि की आँखें खुल गईं। उसका दिल उसके सीने में धड़कने लगा। वह उस बंद कांच के डिब्बे में जो ठंडे तरल से भरा हुआ था, ठंड की वजह से थरथरा रहा था। जैसे ही उसने हॉल के चारों ओर देखा, उसकी आँखों में एक परिचितता का भाव नजर आया। वह उसकी ही प्रयोगशाला थी। यहीं पर उसने अनेक निर्जीव यंत्रों में प्राण फूंक दिए थे..! उसने डिब्बे से बाहर निकलने की कोशिश की, फिर उसने काँच के ऊपर लात बरसानी शुरूवात की। धातु पर धातु टकराने की आवाज आ रही थी। बार-बार झटके लगने से कांच का डिब्बा जमीन पर गिर गया, गिरते ही काँच चकनाचूर हो गयी।
रवि कैसे तो उस काँच के डिब्बे से बाहर आ गया। दूर कहीं से कर्कश आवाजें सुनाई दे रही थी, अनजानी आवाजें कानों पर आघात कर रही थीं।
" बचाओ, बचाओ " वह चिल्लाया। कुछ भी उत्तर नहीं मिला। पैर फर्श पर टिकाकर उसने उठने की कोशिश की। एक बार कोशिश की, दो बार कोशिश की लेकिन हर बार वह अपना संतुलन खोकर जमीन पर गिर जाता था। वह फर्श पर रेंगतें हुए खिड़की के पास पहुँचा। बाहर की सड़क एकदम निर्जन थी।
ट्रैफिक के लाइट के सामने खड़ी गाड़ियाँ अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिल रही थी। फुटपाथ पर मानव खोपड़ियों और कटे शरीर के ढेर पड़े थे। कर्कश आवाज अब असहनीय होती जा रही थी। आकाश की ओर देखते-देखते उसने अपने कान बंद कर लिए। आकाश में बादलों के बीच से सूरज चमक रहा था। हवा में उड़ने वाले धातु के पंखों से सूर्य परिलक्षित हो रहा था। तभी, एक उड़ने वाली मशीन खिड़की के एकदम पास से उड़ गयी। रवि जल्दी से खिड़की के नीचे छिप गया।
हॉल का दरवाजा तुरंत खुल गया और दरवाजे के पीछे से दो-तीन यंत्रमानव अंदर घुसे। बड़े बड़े लोहे के सिर उनके निर्माता के सामने सम्मानपूर्वक झुक गये।
रवि ने तुरंत समझ लिया कि उसकी आत्मा रोबॉट के समझदार प्रजाति के हाथों में है। उनका हर नया अवतार, उनका हर नया रूप धीरे-धीरे मानवता को नष्ट कर रहा है। अभी उसके शरीर में मांस से अधिक धातु का प्रमाण ज्यादा था। उसका यंत्र में ट्रांसफॉर्मेशन लगभग पूरा हो चुका था। लेकिन वह अभी भी थोड़ा आदमी था। रवि ने मन ही मन निश्चय किया, 'मैं मरा तो भी चलेगा लेकिन मैं किसी भी हाल में यंत्रमानव नहीं बनूँगा।'
रवि ने पूरी ताकत से खिड़की के बाहर छलांग लगा दी।
* * *
रोबॉट्स चुप खड़े थे। उन्होंने चुपचाप एक और ह्यूमनॉइड बॉडी को काँच के बक्से में बंद कर दिया। एक रोबॉट ने कंप्यूटर से जुड़ी रबर की नली को हाथों में लिया और उसे उस मानव की गर्दन के पीछे वाले सॉकेट में डाल दिया।
रवि का 23वां यंत्र ट्रांसफॉर्मेशन बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
समाप्त
#लेखनी
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#लेखनी दैनिक प्रतियोगिता
🤫
25-Nov-2021 10:34 PM
👏👏
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pk123
27-Nov-2021 12:17 AM
Thanks
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Shaba
24-Nov-2021 05:04 PM
अद्भुत चित्रण! शानदार प्रस्तुति!
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pk123
27-Nov-2021 12:17 AM
Thanks
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Seema Priyadarshini sahay
24-Nov-2021 12:30 AM
ओ गॉड.. कमाल की इमैजिनेशन।💯
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pk123
24-Nov-2021 09:07 AM
Thanks
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